बिहार का कश्मीर ‘ककोलत’ (Kashmir of Bihar Kakolat)

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बिहार का कश्मीर ‘ककोलत’ (Kashmir of Bihar): देश में वैसे तो कश्मीरऔर विदेश में है स्वीजरलैंड है जो लोकप्रिय के साथ अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए सैलानियों के लिए जन्नत है!! कभी आपने सोचा है कि बिहार में क्या है ?? कुछ नहीं !! जी नहीं अगर आप ऐसा सोच रहें हैं तो आपका सोचना बिल्कुल गलत है। बिहार के पास भी अपना कश्मीर है। और बिहार के इस बेहद सुंदर कश्मीर का नाम है ककोलत (Kakolat)!! यह जगह बिहार के नवादा ज़िले के गोविंदपुर प्रखंड में स्थित है।

Kashmir of Bihar Kakolat

Kashmir of Bihar Kakolat
Kashmir of Bihar Kakolat

ज्यादातर बिहारवासी ‘बिहार के कश्मीर’ (Kashmir of Bihar) से अज्ञात है। बिहार सरकार की तरफ पटना से ककोलत के लिए हर दिन बस खुलती है जो पावापुरी और बिहारशरीफ होते हुए जाती है और रात को वापस पटना लौट आती है।

ककोलत (Kakolat Waterfalls) ठंडे पानी के झड़ने के लिए जाना जाता है। नवादा जिले में यह पिकनिक का सबसे बड़ा स्पॉट माना जाता है। सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि विदेशों से भी यहां हर साल कई सैलानी भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। राजगीर और बोध गया आने वाले विदेशी पर्यटक यहां आना नहीं भूलते।

बिहार का कश्मीर ‘ककोलत’

Kashmir of Bihar Kakolat
Kashmir of Bihar Kakolat

ककोलत (Kakolat Waterfalls) खूबसूरत वादियों के बीच बसा है। चारों तरफ खेत खलिहान, पेड़ पौधे, हल्की ठंडी छटा और हरियाली ही हरियाली। ककोलत अपने आप में प्रकृति कि गोद में बसा प्रकृति की उपहार है। ककोलत एक बेहद खूबसूरत पहाड़ी के पास डेढ़ सौ फुट के ऊंचाई पर बसा एक झरना है। ककोलत की ठंड यहां से तीन किलोमीटर की दूर थाली मोड़ पर ही महसूस होने लगती है। ककोलत झरना जिस पहाड़ी पर बसा है उसे भी ककोलत ही कहते हैं।

ककोलत झरने (Kakolat Waterfalls) के नीचे एक विशाल कुंड है, जिसमें 80 फुट ऊपर से पानी गिरता है। यह दृश्य ककोलत का सबसे मनोरम दृश्य है। नीचे चारों तरफ जंगल है। जहां तमाम तरह के पेड़ पौधें हैं। इनमें कई तरह के औषधिए पेड़ पौधे भी है।

ककोलत (Kakolat Waterfalls)

ककोलत (Kakolat) सिर्फ खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि यह पौराणिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है। हर साल यहां 5 अप्रैल को पांच दिन का सतूआनी मेला लगता है। जिस मेले में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। ककोलत से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि पांडव के अज्ञातवास के वक़्त उन्होंने कुछ समय यही गुज़ारा था। और साथ भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें ककोलत में ही दर्शन दिया था। यहां कोल जाति के लोग निवास करते हैं इसीलिए स्थानीय लोगों का मानना है कि ककोलत नाम उनके नाम से ही

यहां के निवासियों का मानना है कि ककोलत (Kakolat) बिहार की धरोहर है। सरकार इसपर ध्यान नहीं देती । अगर इसे सही तरीके टूर स्पॉट बना दिया जाय तो इससे सरकार को भी राजस्व फायदा होगा। मगर ऐसा होने की बजाय ककोलत के अस्तिव पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि ख़बर है कि यहां राजगीर की तरह रोप वे की व्यवस्था की जा रही है। जिससे पर्यटक के ज्यादा आने कि संभावना है।

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